
Manzar
Poetry/General
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“मंज़र – मन बोधिनी दृश्य” एक बहुविषयक वैचारिक संग्रह है, जो जीवन के विविध आयामों को गहराई से समझने और परखने का प्रयास करता है। यह कृति किसी एक विषय या सीमित दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य और असत्य, प्रेम और दायित्व, समाज और राष्ट्र, समय और संघर्ष, आस्था और आत्ममंथन जैसे अनेक पहलुओं पर आधारित चिंतन का समन्वित रूप प्रस्तुत करती है। यहाँ शब्द केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अंतर्दृष्टि के वाहक हैं। प्रत्येक शीर्षक एक स्वतंत्र वैचारिक प्रस्थान-बिंदु है, जहाँ से लेखक समकालीन यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक प्रश्नों की गहन पड़ताल करता है। इस कृति में पारंपरिक कथानक या छंदबद्ध काव्य की अनिवार्यता नहीं है, बल्कि यह मुक्त गद्य के माध्यम से विचारों की एक स्वायत्त और सशक्त धारा को प्रस्तुत करती है। यहाँ प्रेम केवल भावनात्मक आवेग नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व का अनुशासन है। सत्य केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन-धर्म का संकल्प है। समाज केवल भीड़ नहीं, बल्कि चेतना का प्रतिबिंब है, और युवा केवल आयु नहीं, बल्कि परिवर्तन की संभावना का प्रतीक है। यह पुस्तक पाठक को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि मनन, मंथन और आत्मावलोकन के लिए प्रेरित करती है — एक ऐसा संकलन जो जीवन के विविध प्रसंगों पर गहन और जिम्मेदार विचारों से साक्षात्कार कराता है।
